Notice: Function amp_is_available was called incorrectly. `amp_is_available()` (or `amp_is_request()`, formerly `is_amp_endpoint()`) was called too early and so it will not work properly. WordPress is currently doing the `amp_init` hook. Calling this function before the `wp` action means it will not have access to `WP_Query` and the queried object to determine if it is an AMP response, thus neither the `amp_skip_post()` filter nor the AMP enabled toggle will be considered. It appears the plugin with slug `schema-and-structured-data-for-wp` is responsible; please contact the author. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 2.0.0.) in /var/www/wp-includes/functions.php on line 6078

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Hindi Journalism Day : आखिर क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस जानें इतिहास एंव महत्त्व - JASUS007

Hindi Journalism Day : आखिर क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस जानें इतिहास एंव महत्त्व

हर साल 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। इसी तिथि को पंडित युगल किशोर शुक्ल ने 1826 ई. में प्रथम हिन्दी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन प्रारम्भ किया था। भारत में पत्रकारिता की शुरुआत पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने की थी। हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई, जिसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। आज अखबार एक बड़ा व्यवसाय बन गया है। आज मीडिया पूरे विश्व में अपनी एक विशेष पहचान बना चुका है। <h3> <strong>विकास</strong></h3> हिंदी पत्रकारिता ने एक लंबा सफर तय किया है। जब पंडित जुगल किशोर शुक्ल 'उदंत मार्तंड' लेकर आए तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि हिंदी पत्रकारिता इतना आगे बढ़ जाएगी। जुगल किशोर शुक्ल ने लम्बे समय तक 'उदन्त मार्तण्ड' चलाया और पत्रकारिता करते रहे। लेकिन बाद के दिनों में 'उदन्त मार्तण्ड' को बंद करना पड़ा। यह बंद हो गया क्योंकि पंडित जुगल किशोर के पास इसे चलाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। आजकल पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुत से लोग पैसा लगा रहे हैं। यह एक बड़ा व्यवसाय बन गया है, जो लोग हिंदी का 'खखग' भी नहीं जानते वे हिंदी में आ रहे हैं। 198 वर्षों में हिन्दी समाचार पत्रों एवं समाचार पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। साक्षरता बढ़ी है. पंचायत स्तर पर राजनीतिक चेतना बढ़ी है. इसके साथ ही विज्ञापन भी बढ़े हैं. हिंदी पाठक अपने अखबारों का पूरा समर्थन करते हैं। वे ऐसे अखबार भी खरीदते हैं जो महंगे होते हैं, कम पन्ने वाले होते हैं और खराब कागज से बने होते हैं। एक अंग्रेजी अखबार बेहतर कागज पर होता है, इसमें अधिक पृष्ठ होते हैं और लागत कम होती है। इसकी वजह इसका बिजनेस मॉडल है. <h3> <strong>हिंदी पत्रकारिता</strong></h3> मुख्य लेख: भारत में हिन्दी पत्रकारिता<br /> हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। राजा राम मोहन राय प्रेस को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे। भारतीयों के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों को बरकरार रखा। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वासों और कुरीतियों पर प्रहार किया और अपने पत्रों के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलाई। राममोहन राय ने कई समाचार पत्र शुरू किये, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है – 1816 में प्रकाशित 'बंगाल गजट'। बंगाल गजट पहला भारतीय भाषा का समाचार पत्र है। इस समाचार पत्र के संपादक गंगाधर भट्टाचार्य थे। इसके अलावा राजा राममोहन राय ने 'मिरातुल', 'संवाद कौमुदी', 'बंगाल हेराल्ड' समाचार पत्र भी प्रकाशित किये और लोगों में जागरूकता फैलायी। 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में कलकत्ता से प्रकाशित 'उदंत मार्तंड' को पहला हिंदी समाचार पत्र माना जाता है। <h3> <strong>शिवपूजन सहाय का योगदान</strong></h3> हिन्दी पत्रकारिता के प्रणेता आचार्य शिवपूजन सहाय 1910 से 1960 ई.। तब तक वे 'आज', 'सन्मार्ग', 'आर्यावर्त', 'हिमालय' आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सार्थक लेख लिखते रहे। इस बीच उन्होंने हिंदी अखबारों और पत्रकारिता की स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की. अपने लेखों के माध्यम से वे जहां भाषा के प्रति सजग दिखे, वहीं उन्होंने पूंजीपतियों के दबाव में संपादकों के अधिकारों के ह्रास पर भी चिंता व्यक्त की। आचार्य शिवपूजन सहाय ने अपने लेख "हिन्दी दैनिक पत्र" में लिखा है कि – "लोग दैनिक समाचार-पत्रों का साहित्यिक महत्व नहीं समझते, बल्कि उन्हें राजनीतिक जागरूकता का साधन मात्र मानते हैं। परन्तु हमारे देश के दैनिक-पत्रों ने बहुत बड़ा काम किया है। देश को जागरूक करने के लिए अथक परिश्रम किया है।'' उन्होंने हिंदी प्रेमी जनता में साहित्यिक चेतना जगाने का काम किया है और उन्हें श्रेय भी मिला है। आज हमें दैनिक समाचार पत्रों की मदद से भी भाषा और साहित्य की प्रगति में मदद मिलती है।<br /> <br /> शिवपूजन सहाय ने यह भी कहा कि "दैनिक समाचार पत्र भारत के आम लोगों तक पहुंचने का सबसे अच्छा साधन है। दैनिक समाचार पत्रों के माध्यम से देश-विदेश की खबरों के साथ-साथ भाषा और साहित्य का संदेश भी लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है और आगे भी पहुंचाया जाता है।" इसलिए कुछ दैनिक समाचार पत्र हर सप्ताह एक विशेष संस्करण भी निकालते हैं, जिसमें कई दैनिक समाचार पत्रों की तुलना में बेहतर साहित्यिक सामग्री होती है, लेकिन हमें समाज की वैचारिक स्थिति का विवरण भी मिलता है, लेकिन यदि दैनिक समाचार पत्रों ने यह काम छोड़ दिया होता साप्ताहिक और मासिक जिनकी पहुंच और जनसंख्या आज दैनिक समाचार पत्रों की तरह ही जनता के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है, निश्चित रूप से कई कमियां दूर हो गई होंगी।