Shekhar Suman On PM Modi: शेखर सुमन बोले- पीएम मोदी कमजोर नहीं हैं, मेरे शो से सरकार को डरने की जरूरत नहीं; ईडी की रेड पर भी दिया जवाब

Shekhar Suman Shekhar Suman

Shekhar Suman: अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन इन दिनों अपने यूट्यूब शो ‘शेखर टुनाइट’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्य के जरिए अपनी बात रखते हैं। शो के कुछ एपिसोड को लेकर ऐसी चर्चाएं शुरू हुईं कि ये भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार के खिलाफ बनाया जा रहा है। अब शेखर सुमन ने इन तमाम अटकलों पर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ कहा है कि उनका शो किसी राजनीतिक पार्टी या नेता के खिलाफ नहीं है, बल्कि व्यवस्था की कमियों और सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

शेखर सुमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि वो इतने कमजोर नहीं हैं कि उनके छोटे से शो को लेकर सरकार की ओर से उन्हें फोन किया जाए या कार्यक्रम बंद करने का दबाव बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि व्यंग्य लोकतंत्र और उनके पेशे का हिस्सा है। अगर व्यवस्था में कुछ गलत हो रहा है, तो उस पर सवाल उठाना जरूरी है।

‘शेखर टुनाइट’ बीजेपी या सरकार के खिलाफ नहीं

शेखर सुमन ने इंडिया टुडे के सहयोगी चैनल ‘द लल्लनटॉप’ को दिए इंटरव्यू में अपने शो को लेकर फैली गलतफहमी पर बात की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि उनका कार्यक्रम बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। उनके मुताबिक, शो का मकसद किसी एक पार्टी, नेता या सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को सामने लाना है।

शेखर ने समझाया कि जब जनता किसी व्यक्ति को व्यवस्था चलाने की जिम्मेदारी सौंपती है, तो उससे जवाबदेही की उम्मीद भी करती है। अगर जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति रास्ते से भटकता है, तो उसे उसकी गलती बताना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका शो किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि जनता के पक्ष में है। वह आम लोगों की आवाज को मंच देने की कोशिश करते हैं।

अभिनेता के मुताबिक, सत्ता में कौन बैठा है, इससे उनके व्यंग्य का आधार नहीं बदलता। आज कोई दूसरी पार्टी सत्ता में है और कल कोई अन्य पार्टी सरकार बना सकती है, लेकिन व्यवस्था की गलतियों पर सवाल उठाने का उनका तरीका पहले जैसा ही रहेगा।

अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर मनमोहन सिंह तक पर कर चुके हैं व्यंग्य

शेखर सुमन ने अपने पुराने कार्यक्रम ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ का उदाहरण देते हुए बताया कि राजनीतिक व्यंग्य उनके लिए कोई नई बात नहीं है। उनका यह चर्चित कार्यक्रम पहली बार 1997 में प्रसारित हुआ था। उस समय केंद्र में बीजेपी की सरकार थी। इसके बाद 2012 में यह कार्यक्रम दोबारा आया, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी।

उन्होंने कहा कि उस समय भी उनके कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर व्यंग्य किया जाता था और बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर भी चुटकी ली जाती थी। उनके अनुसार, इसका मतलब किसी पार्टी का विरोध करना नहीं था, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों और व्यवस्था की कमियों पर टिप्पणी करना था।

शेखर ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सिस्टम का नेतृत्व कर रहा है और उससे कोई गलती होती है, तो उस पर सवाल उठाना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, राजनीतिक व्यंग्य को केवल सरकार के विरोध के रूप में देखना सही नहीं है।

पीएम मोदी और राहुल गांधी के लिए कही ये बात

इंटरव्यू में शेखर सुमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी का उतना ही सम्मान करते हैं, जितना कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी नेता के प्रति सम्मान रखने का मतलब यह नहीं है कि उसकी गलतियों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।

शेखर के अनुसार, जब कुछ गलत होता है, तो उसके खिलाफ बोलना उचित है। किसी व्यक्ति का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने वालों से सवाल पूछना भी जरूरी है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने वाले कुछ वीडियो हटाए जाने को लेकर उठने वाली चर्चाओं पर भी अपनी राय रखी। शेखर ने कहा कि ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन हर मामले के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, अगर व्यवस्था में कहीं गड़बड़ी हो रही है, तो उस पर सवाल उठना चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नेतृत्व करने वाले लोग व्यवस्था के चेहरे होते हैं, लेकिन जरूरी यह है कि सिस्टम में जवाबदेही बनी रहे।

‘पीएम मोदी इतने कमजोर नहीं कि मेरे शो के लिए फोन करें’

शेखर सुमन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शक्तिशाली नेता बताते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री अपने छोटे से शो को लेकर परेशान होंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई बड़े मुद्दे चल रहे हैं, जिन पर प्रधानमंत्री को ध्यान देना पड़ता है। ऐसे में उनके शो को लेकर सरकार की ओर से किसी तरह का दबाव बनाए जाने की आशंका उन्हें सही नहीं लगती।

शेखर ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि पीएम मोदी इतने कमजोर हैं कि उनकी सरकार मुझे इतने छोटे से शो के लिए फोन करेगी। वह बहुत शक्तिशाली व्यक्ति हैं। दुनिया में कई दूसरी चीजें हो रही हैं, जिन पर उनका ध्यान जाना ज्यादा जरूरी है। शेखर टुनाइट के अलावा भी दुनिया में कई दुख हैं।”

इस बात को समझाने के लिए उन्होंने फैज अहमद फैज की मशहूर नज्म ‘मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग’ की पंक्ति का भी संदर्भ दिया। उनके बयान का आशय यह था कि देश और दुनिया में इतने बड़े मुद्दे मौजूद हैं कि उनके शो को लेकर सरकार के चिंतित होने की बात उन्हें तर्कसंगत नहीं लगती।

शेखर ने कहा कि शो के पहले एपिसोड के बाद कुछ लोगों ने टिप्पणी की थी कि शायद इसका दूसरा एपिसोड कभी प्रसारित नहीं होगा। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इसे रोकेगा कौन? उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि उनकी आलोचना की जा सकती है। इसी सोच से उन्हें अपना कार्यक्रम जारी रखने का भरोसा मिला।

बीजेपी नेताओं से मिले फोन, लेकिन धमकी नहीं मिली

शेखर सुमन ने यह भी दावा किया कि उन्हें बीजेपी सरकार की ओर से शो बंद करने या किसी वीडियो को हटाने के लिए कोई फोन नहीं आया। इसके उलट, उनके मुताबिक, कई राजनीतिक नेताओं ने उन्हें फोन करके कार्यक्रम की सराहना की। कुछ नेता उनसे मिलने उनके घर तक आए।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में जब बीजेपी के नेताओं के फोन आने लगे, तो उन्हें लगा कि शायद इसके पीछे कोई गलत वजह होगी। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि ऐसा नहीं था। शेखर ने इन नेताओं को ईमानदार और गंभीर बताया।

अभिनेता ने उन दावों पर भी सवाल उठाया कि मौजूदा माहौल में कोई भी व्यक्ति सरकार या नेताओं के खिलाफ अपनी बात नहीं रख सकता। उन्होंने कहा कि लोग अपनी आवाज उठा रहे हैं और लोकतंत्र में आलोचना की जगह होनी चाहिए।

शो के निर्माता के दफ्तर पर ईडी की छापेमारी पर क्या बोले?

‘शेखर टुनाइट’ की चर्चा के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्यक्रम के निर्माता धर्मेश सांघानी के कार्यालय पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब शो के एक व्यंग्यात्मक एकालाप को लेकर भी चर्चा हो रही थी, जिसमें कथित तौर पर तानाशाह का संदर्भ दिया गया था। इसके बाद कुछ लोगों ने दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने की आशंका जताई।

हालांकि, शेखर सुमन ने इस कार्रवाई को सीधे अपने शो की सामग्री से जोड़ने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि छापेमारी किस वजह से हुई। हो सकता है कि निर्माता का कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक मामला रहा हो। उन्होंने भुगतान में देरी जैसी संभावना का भी जिक्र किया।

शेखर ने कहा कि धर्मेश सांघानी दूसरे कारोबार से भी जुड़े हुए हैं और उनके अन्य व्यावसायिक संबंध हो सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए निर्माता वाशु भगनानी के प्रोडक्शन हाउस पूजा एंटरटेनमेंट पर ईडी की हालिया कार्रवाई का भी उल्लेख किया।

शेखर के मुताबिक, उन्होंने सांघानी से यह नहीं पूछा कि उनके कार्यालय पर छापेमारी क्यों हुई थी। इसलिए वह इस मामले में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकालना चाहते।

निर्माता ने कहा- शो बंद मत करना, मैं साथ हूं

शेखर सुमन ने निर्माता धर्मेश सांघानी की तारीफ भी की। उन्होंने बताया कि शो के अलग तरह के प्रारूप के बारे में पहले ही निर्माता को जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद सांघानी ने कार्यक्रम का समर्थन जारी रखा।

शेखर के अनुसार, निर्माता ने उनसे कहा कि शो बंद करने की जरूरत नहीं है और उन्हें अपना काम जारी रखना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ हैं और डरने की कोई जरूरत नहीं है। शेखर ने इस समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।

अभिनेता ने एक बार फिर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सरकार उनके कार्यक्रम से इतनी परेशान होगी कि उसे रोकने के लिए कोई कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में इतनी कमजोर होती कि एक छोटे से व्यंग्य कार्यक्रम से घबरा जाती, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होता।

लोकतंत्र में आलोचना और व्यंग्य को जरूरी मानते हैं शेखर

शेखर सुमन के पूरे बयान का सार यही है कि वह अपने शो को किसी राजनीतिक दल के विरोध का माध्यम नहीं मानते। उनका कहना है कि राजनीतिक व्यंग्य का उद्देश्य सत्ता में बैठे लोगों को अपमानित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान दिलाना है।

उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री हो या विपक्ष का नेता, सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले हर व्यक्ति से सवाल पूछे जा सकते हैं। किसी नेता के प्रति सम्मान और उसकी नीतियों या फैसलों की आलोचना, दोनों एक साथ संभव हैं।

‘शेखर टुनाइट’ को लेकर उठे विवाद के बीच शेखर सुमन ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी की छापेमारी और उनके शो के बीच संबंध होने की बात को लेकर उनके पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। इसलिए उन्होंने इस कार्रवाई पर अटकल लगाने से परहेज किया।

फिलहाल, उनका रुख साफ है कि वह अपने कार्यक्रम के जरिए व्यवस्था पर व्यंग्य करना जारी रखना चाहते हैं। उनके अनुसार, सत्ता बदलने से आलोचना का अधिकार खत्म नहीं होता। लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना और जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगना जरूरी है। यही उनके शो की मूल सोच है।