Ranjhanaa के AI एडिटेड एंडिंग पर बवाल, आनंद एल राय और धनुष जाएंगे कोर्ट

Ranjhanaa के AI एडिटेड एंडिंग पर बवाल, आनंद एल राय और धनुष जाएंगे कोर्ट Ranjhanaa के AI एडिटेड एंडिंग पर बवाल, आनंद एल राय और धनुष जाएंगे कोर्ट

बॉलीवुड फिल्म ‘रांझणा’ एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह है इसका विवादास्पद एआई-जनरेटेड नया अंत, जिसने फिल्म की मूल भावनाओं को ही पलट कर रख दिया है। निर्देशक आनंद एल राय और अभिनेता धनुष ने इस नई रिलीज़ को न केवल अस्वीकार किया है बल्कि इसे कलात्मक स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। दोनों अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं।

2013 में रिलीज हुई ‘रांझणा’

2013 में रिलीज हुई ‘रांझणा’ एक भावनात्मक और करुण प्रेमकथा थी, जो अपने दुखद अंत के कारण दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ गई थी। फिल्म के अंत में जब कुंदन (धनुष) की मौत हो जाती है, वह क्षण नायक के बलिदान और प्रेम की गहराई को दर्शाता है। लेकिन हाल ही में जारी एआई-एडिटेड वर्जन में यह पूरा दृश्य बदल दिया गया है। अब कुंदन अस्पताल में होश में आता है और उसके दोस्त खुशी मनाते दिखते हैं।

इस बदलाव से निर्देशक आनंद एल राय बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि बिना इजाज़त उनकी फिल्म को डिजिटल रूप से बदलना न केवल रचनात्मक धोखा है बल्कि यह भविष्य में ऐसी कई फिल्मों के लिए भी खतरे की घंटी है। उन्होंने साफ किया कि ये परिवर्तन उनकी जानकारी के बिना हुआ और अब वो इस मामले में न्यायिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

अभिनेता धनुष ने भी नाराजगी जाहिर की

अभिनेता धनुष ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने लिखा कि फिल्म की आत्मा को इस बदले हुए अंत ने नष्ट कर दिया है और यह पूरी प्रक्रिया उनके मना करने के बावजूद आगे बढ़ाई गई।

विवाद का दूसरा पक्ष है एरोस इंटरनेशनल, जो फिल्म के अधिकारों का मालिक है। एरोस का दावा है कि उन्हें कानूनी तौर पर यह अधिकार प्राप्त है कि वे फिल्म की सामग्री में बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, आनंद एल राय का आरोप है कि उन्हें बिना जानकारी दिए यह फैसला लिया गया।

एरोस ने लगाया आरोप

मामला और जटिल तब हो गया जब एरोस ने आरोप लगाया कि राय ने अपनी आने वाली फिल्म ‘तेरे इश्क़ में’ के लिए ‘रांझणा’ की कुछ बौद्धिक संपत्ति का उपयोग किया है। इससे यह विवाद सिर्फ एक फिल्म तक सीमित न रहकर बौद्धिक संपदा के अधिकारों की बड़ी बहस में तब्दील हो गया है।

यह पूरा घटनाक्रम भारतीय फिल्म उद्योग में एक नई बहस को जन्म दे रहा है – क्या एआई के जरिए किसी फिल्म का अंत बदलना नैतिक या वैध है? क्या प्रोड्यूसर के पास इतनी स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह निर्देशक की कल्पना को ही बदल दे?

इन सवालों के जवाब अदालत तय करेगी, लेकिन यह तय है कि रांझणा अब केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि रचनात्मक स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक बन गई है।