370 Biryani Controversy: कॉमेडियन प्रणित मोरे से जुड़े 370 बिरयानी विवाद का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मोरे ने उनके खिलाफ दर्ज अलग-अलग एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि विवादित वीडियो को प्रणित मोरे की मंजूरी के बिना उनकी PR टीम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है।
क्या है ₹370 बिरयानी विवाद?
यह विवाद इसी साल जून में सामने आया था। प्रणित मोरे के एक शो के दौरान हिमांशु जांगड़ा नाम के एक व्यक्ति ने डेट से जुड़ा एक मजाक किया था। वायरल हुए वीडियो में जांगड़ा ने कहा था कि उसने एक लड़की के साथ डेट पर ₹370 की बिरयानी पर खर्च किए और इसके बदले वह शारीरिक संबंध का हकदार महसूस कर रहा था।
इस मजाक पर प्रणित मोरे को हंसते हुए देखा गया था। बाद में शो का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रणित मोरे के इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं।
सुप्रीम कोर्ट में मोरे ने क्या कहा?
प्रणित मोरे की ओर से पेश वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि कॉमेडियन ने इस मामले को लेकर अलग-अलग मंचों पर माफी मांगी है। उनके वकील के मुताबिक, मोरे उस कार्यक्रम में सिर्फ होस्ट की भूमिका में थे।
वकील ने कोर्ट में कहा कि मोरे स्थिति की गंभीरता को समझते हैं और वह मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनकी मुख्य मांग यह है कि गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर को मुंबई में दर्ज एफआईआर के साथ क्लब किया जाए।
‘PR टीम ने मेरी मंजूरी के बिना वीडियो पोस्ट किया’
सुनवाई के दौरान प्रणित मोरे की ओर से एक अहम दावा भी रखा गया। उनके वकील ने बताया कि जब उन्हें विवाद की गंभीरता का पता चला, तब उन्होंने वीडियो को डिलीट कर दिया था।
वकील के मुताबिक, उस समय मोरे यात्रा कर रहे थे और उनकी PR टीम ने उनकी अनुमति लिए बिना वीडियो को प्रकाशित कर दिया था। कोर्ट के सामने कहा गया कि वीडियो पोस्ट करने से पहले कॉमेडियन की मंजूरी नहीं ली गई थी। वकील ने यह भी कहा कि प्रणित मोरे ने नेशनल कमीशन फॉर वुमेन समेत सभी संबंधित मंचों पर माफी मांगी है।
अलग-अलग एफआईआर को क्लब करने की मांग
प्रणित मोरे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि एक ही विवाद से जुड़े मामलों को अलग-अलग जगहों पर चलाने के बजाय उन्हें क्लब किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान मोरे की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि वह मामले में होने वाली कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं।
केंद्र और दो राज्यों से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। अब संबंधित पक्षों के जवाब के बाद अदालत इस याचिका पर आगे विचार करेगी।
फिलहाल कोर्ट ने मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। इसलिए प्रणित मोरे की ओर से सुनवाई के दौरान रखे गए दावों और विवादित वीडियो को लेकर सामने आए आरोपों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग एफआईआर को एक साथ जोड़ा जाएगा या नहीं।