Dupahiya Season 2 Review: निरहुआ की एंट्री भी नहीं बचा पाई धीमी कहानी, हंसी की गाड़ी बार-बार हुई बेपटरी ⭐
JASUS007 Rating: ⭐⭐ 2/5
⭐ Dupahiya Season 2 Rating
कहानी: ⭐⭐☆☆☆ — 2/5
कहानी में कई मुद्दे हैं, लेकिन ज्यादा ट्रैक होने के कारण असर कमजोर पड़ता है।
स्क्रीनप्ले: ⭐⭐☆☆☆ — 2/5
धीमी रफ्तार और लंबे दृश्य कई जगह सीरीज की पकड़ कमजोर करते हैं।
अभिनय: ⭐⭐⭐⭐☆ — 4/5
गजराज राव, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, रेणुका शहाणे और बाकी कलाकार अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
कॉमेडी: ⭐⭐☆☆☆ — 2/5
कुछ सीन हंसाते हैं, लेकिन कॉमेडी लगातार प्रभावी नहीं रहती।
निर्देशन: ⭐⭐☆☆☆ — 2/5
अच्छी स्टारकास्ट के बावजूद कहानी को ज्यादा कसावट की जरूरत महसूस होती है।
मनोरंजन: ⭐⭐☆☆☆ — 2/5
⭐ Overall JASUS007 Rating: 2/5
‘दुपहिया’ के पहले सीजन ने गांव की छोटी-छोटी परेशानियों, रिश्तों और देसी कॉमेडी को जिस सादगी के साथ पेश किया था, उसी वजह से इसके दूसरे सीजन से उम्मीदें बढ़ना स्वाभाविक था। लेकिन Dupahiya Season 2 Review में सबसे बड़ी शिकायत यही निकलकर सामने आती है कि इस बार कहानी का दायरा तो बढ़ाया गया है, मगर मनोरंजन उसी अनुपात में नहीं बढ़ता।
सीजन 2 दर्शकों को एक बार फिर धड़कपुर गांव में लेकर जाता है। पुराने किरदार लौटते हैं और उनके साथ कुछ नई परिस्थितियां तथा नए चेहरे कहानी में शामिल होते हैं। दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ की मौजूदगी सीरीज में नया रंग जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कई हिस्सों में धीमी रफ्तार और जरूरत से ज्यादा किरदार कहानी की पकड़ कमजोर कर देते हैं।
Dupahiya Season 2 Review: धड़कपुर में नई मुसीबत, लेकिन कहानी में पुरानी वाली रफ्तार नहीं
दूसरे सीजन में बनवारी और उसके परिवार की जिंदगी फिर नई परेशानियों में उलझती दिखाई देती है। गांव में मोबाइल टावर लगाने की योजना एक नए विवाद को जन्म देती है। पुष्पलता इसका विरोध करती हैं, जबकि भूगोल की सोशल मीडिया वाली जिंदगी उसके पिता बनवारी के लिए नई परेशानी बन जाती है।

दूसरी तरफ रोशनी अपनी एसएससी परीक्षा को लेकर संघर्ष कर रही है। उसकी तैयारी, परीक्षा पास करने का दबाव और अमावस के साथ उसका रिश्ता कहानी को आगे बढ़ाता है। इसी ट्रैक में कोचिंग सेंटर चलाने वाले प्रथम कुमार के रूप में दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ की एंट्री होती है।
कागज पर देखें तो कहानी में गांव, परिवार, परीक्षा, प्रेम, सोशल मीडिया, राजनीति और संभावित गड़बड़ी जैसे कई तत्व मौजूद हैं। समस्या यह है कि इतने सारे ट्रैक एक साथ चलने के कारण किसी एक कहानी को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
पहले सीजन की खूबी उसकी सादगी थी। छोटे मुद्दे भी दिलचस्प लगते थे क्योंकि दर्शकों को किरदारों के साथ जुड़ने का मौका मिलता था। दूसरे सीजन में कई बार ऐसा महसूस होता है कि कहानी लगातार अगली घटना की तरफ बढ़ना चाहती है, लेकिन उसकी गति फिर भी धीमी बनी रहती है।
कलाकार मजबूत, निरहुआ लाते हैं ताजगी
सीरीज का सबसे मजबूत पक्ष इसकी स्टारकास्ट है। गजराज राव एक बार फिर अपने सहज अभिनय से बनवारी के किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग कई साधारण दृश्यों में भी जान डाल देती है। रेणुका शहाणे अपनी भूमिका में स्वाभाविक दिखाई देती हैं।
स्पर्श श्रीवास्तव को इस बार भी अच्छा स्क्रीन स्पेस मिला है। भूगोल के किरदार में सोशल मीडिया और परिवार के बीच चल रही खींचतान के जरिए नई परिस्थितियां पैदा की गई हैं। शिवानी रघुवंशी और भुवन अरोड़ा भी अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाते हैं।
दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ की एंट्री दूसरे सीजन का बड़ा आकर्षण कही जा सकती है। उनका देसी अंदाज कहानी में कुछ नए और मजेदार पल जोड़ता है। उनकी मौजूदगी उन हिस्सों में सीरीज को ऊर्जा देती है जहां कहानी कमजोर पड़ती नजर आती है।
यशपाल शर्मा जैसे अनुभवी कलाकार भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। कुल मिलाकर कलाकारों की तरफ से बड़ी शिकायत नहीं है। परेशानी मुख्य रूप से उस कहानी और स्क्रीनप्ले में दिखाई देती है जिसमें इतने किरदारों को एक साथ संभालने की कोशिश की गई है।
कॉमेडी और स्क्रीनप्ले में कमजोर पड़ता है दूसरा सीजन
Dupahiya Season 2 Review में सबसे कमजोर हिस्सा इसकी pacing कही जा सकती है। शुरुआत में कहानी को सेट होने में समय लगता है और उम्मीद रहती है कि आगे जाकर घटनाएं तेजी पकड़ेंगी। लेकिन बीच के हिस्से में भी कई दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं।
कॉमेडी मौजूद है, लेकिन हर मजाक असरदार नहीं बन पाता। कुछ परिस्थितियां स्वाभाविक हंसी पैदा करती हैं, जबकि कुछ जगह ऐसा महसूस होता है कि दृश्य को सिर्फ मजेदार बनाने के लिए खींचा गया है।
यही समस्या emotional moments के साथ भी आती है। दर्शक जैसे ही किसी किरदार की परेशानी या रिश्ते से जुड़ना शुरू करता है, कहानी दूसरे ट्रैक पर चली जाती है। इसका सीधा असर emotional connection पर पड़ता है।
निर्देशक सोनम नायर ने धड़कपुर की दुनिया और उसके परिचित माहौल को बरकरार रखने की कोशिश की है। विजुअल टोन और गांव का माहौल सीरीज की पहचान से मेल खाता है, लेकिन दूसरे सीजन को ज्यादा कसा हुआ screenplay मिलता तो नतीजा कहीं बेहतर हो सकता था।
JASUS007 Rating
कहानी: ⭐⭐☆☆☆ 2/5
कई दिलचस्प मुद्दे हैं, लेकिन बहुत सारे ट्रैक कहानी को बिखेर देते हैं।
स्क्रीनप्ले: ⭐⭐☆☆☆ 2/5
बीच के हिस्सों में धीमी गति सबसे बड़ी कमजोरी बनती है।
अभिनय: ⭐⭐⭐⭐☆ 4/5
गजराज राव, निरहुआ, रेणुका शहाणे, स्पर्श श्रीवास्तव और बाकी कलाकार मजबूत पक्ष हैं।
कॉमेडी: ⭐⭐☆☆☆ 2/5
कुछ दृश्य हंसाते हैं, लेकिन पहले सीजन जैसी लगातार ताजगी महसूस नहीं होती।
निर्देशन: ⭐⭐☆☆☆ 2/5
अच्छे कलाकार और दिलचस्प सेटअप होने के बावजूद कहानी पूरी तरह नियंत्रित नहीं रह पाती।
मनोरंजन: ⭐⭐☆☆☆ 2/5
Overall JASUS007 Rating: ⭐⭐ 2/5
निष्कर्ष
Dupahiya Season 2 Review का निष्कर्ष यही है कि दूसरे सीजन में कलाकार इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले उनका पूरा फायदा नहीं उठा पाते। निरहुआ की एंट्री कुछ हिस्सों में ताजगी जरूर लाती है और गजराज राव सहित पुरानी स्टारकास्ट अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाती है।
अगर आपने पहला सीजन पसंद किया था और धड़कपुर के किरदारों को दोबारा देखना चाहते हैं, तो दूसरा सीजन एक बार देखा जा सकता है। लेकिन पहले सीजन जैसी सरल, लगातार मजेदार और कसावट वाली कहानी की उम्मीद लेकर जाएंगे तो यह सीजन कमजोर महसूस हो सकता है।
JASUS007 की तरफ से ‘दुपहिया सीजन 2’ को 5 में से 2 स्टार।