Amitabh Bachchan Coolie Accident: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे हादसे हुए हैं, जिन्होंने फिल्मों की कहानी के साथ-साथ सितारों की जिंदगी भी बदल दी। साल 1982 में फिल्म ‘कुली’ के सेट पर अमिताभ बच्चन के साथ हुआ हादसा भी ऐसा ही एक मामला था। यह दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि अमिताभ बच्चन की जिंदगी तक खतरे में पड़ गई थी। इस हादसे के बाद देशभर में उनके चाहने वालों ने उनके लिए दुआएं की थीं। हालांकि, अब इस घटना से जुड़े कुछ पुराने पहलुओं को फाइट डायरेक्टर पप्पू वर्मा ने एक इंटरव्यू में याद किया है।
यूट्यूबर राजीव चौधरी से बातचीत में पप्पू वर्मा ने 1982 में ‘कुली’ के सेट पर हुए उस हादसे को लेकर कई बातें साझा कीं। उनके मुताबिक, जिस दिन अमिताभ बच्चन घायल हुए, उसी दिन सेट पर एक और स्टंट के दौरान स्टंटमैन शक्ति को भी चोट लगी थी। एक फाइट सीन में शक्ति को मुक्का मारा गया था, जिससे उनकी आंख के पास चोट लग गई। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें दो टांके लगाने पड़े।
लेकिन इसके कुछ समय बाद सेट पर अमिताभ बच्चन और पुनीत इस्सर के बीच एक अलग फाइट सीन शूट किया जाना था। उस समय पुनीत इस्सर फिल्म इंडस्ट्री में अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर रहे थे। सीन के दौरान दोनों कलाकारों के बीच फाइट कोरियोग्राफी के मुताबिक शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान पुनीत इस्सर का एक मुक्का अमिताभ बच्चन के शरीर के बेहद संवेदनशील हिस्से पर जा लगा।
पप्पू वर्मा के मुताबिक, यह चोट मामूली नहीं थी। मुक्का अमिताभ बच्चन की धमनियों के आसपास के संवेदनशील हिस्से पर लगा था और इसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। उस समय सेट पर मौजूद लोगों को अंदाजा नहीं था कि यह घटना आगे चलकर इतनी बड़ी समस्या बन जाएगी। देखते ही देखते पूरा माहौल बदल गया और अमिताभ बच्चन को इलाज के लिए ले जाना पड़ा।
इस हादसे ने सिर्फ अमिताभ बच्चन के परिवार और फिल्म की टीम को ही नहीं, बल्कि पुनीत इस्सर को भी गहरे सदमे में डाल दिया था। क्योंकि पुनीत उस समय अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर रहे थे। टीम के बीच यह चिंता भी थी कि कहीं इस हादसे का असर उनके करियर पर न पड़ जाए। उस वक्त यह सवाल भी उठ रहा था कि अगर लोगों को पता चला कि फाइट सीन के दौरान पुनीत के मुक्के से अमिताभ बच्चन गंभीर रूप से घायल हुए हैं, तो इसका क्या असर होगा।
पप्पू वर्मा ने बताया कि इसके बाद शूटिंग को लेकर एक अलग स्थिति पैदा हो गई थी। अगले सीन में अमिताभ बच्चन को एक टेबल के ऊपर से गिरना था। ऐसे में टीम ने कहानी को इस तरह पेश करने का फैसला किया कि चोट टेबल से गिरने के कारण लगी है। यानी असली घटना को तत्काल सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश की गई।
फाइट डायरेक्टर के अनुसार, फिल्म के निर्देशक मनमोहन देसाई ने भी टीम से इस घटना के बारे में ज्यादा चर्चा नहीं करने को कहा था। उस समय शूटिंग के माहौल और अमिताभ बच्चन की हालत को देखते हुए टीम ने घटना की असली वजह को सामने नहीं आने दिया। हालांकि, बाद में मीडिया के जरिए हादसे से जुड़ी कई बातें सामने आती चली गईं।
अमिताभ बच्चन के लिए यह हादसा बेहद गंभीर साबित हुआ। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, वह करीब छह महीने तक अस्पताल में इलाज कराते रहे। इस दौरान देशभर में उनके प्रशंसक उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे। अमिताभ बच्चन उस दौर में हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल थे और उनके साथ हुई दुर्घटना ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया था।
इस हादसे के बाद फिल्म सेट पर स्टंट और सुरक्षा को लेकर भी कई तरह की सावधानियां बढ़ाई गईं। पप्पू वर्मा के मुताबिक, इसके बाद फाइट सीन में इस बात का खास ध्यान रखा जाने लगा कि किसी कलाकार के पेट या शरीर के बेहद संवेदनशील हिस्से पर सीधे मुक्के न लगाए जाएं। शूटिंग के लिए चांदीवली में सेट तैयार किया गया था और अमिताभ बच्चन की तबीयत में सुधार होने के बाद फिल्म का काम दोबारा आगे बढ़ा।
‘कुली’ का निर्देशन मनमोहन देसाई ने किया था। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने इकबाल नाम के कुली का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी, एक्शन और अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता ने इसे उस दौर की बेहद चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया। लेकिन फिल्म की पहचान सिर्फ इसकी सफलता तक सीमित नहीं रही। इसके सेट पर हुआ हादसा भी फिल्म के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
दिलचस्प बात यह है कि ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान हुए इस हादसे के बाद फिल्म में अमिताभ बच्चन की चोट को लेकर दर्शकों के बीच भी जबरदस्त भावनात्मक जुड़ाव पैदा हुआ। जब फिल्म रिलीज हुई तो उस हादसे की चर्चा पहले से ही लोगों के बीच थी। अमिताभ बच्चन को पर्दे पर देखने के लिए सिनेमाघरों में भारी भीड़ उमड़ी। उनके प्रशंसकों के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई थी, बल्कि उनके पसंदीदा अभिनेता के संघर्ष और वापसी की कहानी भी बन गई थी।
पुनीत इस्सर के लिए भी यह घटना जिंदगी की सबसे कठिन यादों में शामिल हो गई। एक अभिनेता के तौर पर उनका करियर उस समय शुरू ही हुआ था और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारे के साथ हुए इस हादसे ने उन्हें लंबे समय तक सवालों और चर्चाओं के बीच रखा। हालांकि, समय के साथ पुनीत इस्सर ने फिल्म और टेलीविजन में अपनी अलग पहचान बनाई।
पप्पू वर्मा की हालिया बातचीत में सामने आया यह किस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस दौर की फिल्म इंडस्ट्री के काम करने के तरीके की झलक देता है। आज शूटिंग के दौरान सुरक्षा मानकों, स्टंट कोऑर्डिनेशन और मेडिकल सपोर्ट पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, लेकिन उस दौर में एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग काफी जोखिम भरी हुआ करती थी। कई बार कलाकार खुद खतरनाक स्टंट करते थे और छोटी सी चूक भी गंभीर परिणाम दे सकती थी।
अमिताभ बच्चन के मामले में भी एक फाइट सीन की छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी। हालांकि वह लंबे इलाज के बाद स्वस्थ हुए और फिर फिल्मों में लौटे। उनकी वापसी ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया। ‘कुली’ भी आगे चलकर उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हुई।
आज दशकों बाद भी ‘कुली’ के सेट पर हुआ वह हादसा बॉलीवुड के सबसे चर्चित फिल्मी हादसों में गिना जाता है। पप्पू वर्मा की बताई गई यादों ने इस घटना से जुड़े उन पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है, जिनके बारे में उस समय ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई थी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को पप्पू वर्मा की यादों और उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
अमिताभ बच्चन ने उस हादसे के बाद न सिर्फ जिंदगी की जंग जीती, बल्कि दोबारा फिल्मों में लौटकर यह साबित किया कि एक बड़ा सितारा सिर्फ पर्दे पर अपनी लोकप्रियता से नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता से भी पहचाना जाता है। ‘कुली’ इसलिए आज भी सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं, बल्कि अमिताभ बच्चन के जीवन और करियर के उस दौर की याद है, जब एक फिल्म के सेट पर हुआ हादसा उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया था।