केदारनाथ में हुआ लैंडस्लाइड, 5 हजार तीर्थयात्रियों को किया रेस्क्यू, अब भी फंसे हुए है 300 लोग, जानिए पूरा मामला

 उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। केदारनाथ यात्रा के पैदल रूट पर 1 अगस्त की रात भारी बारिश, लैंडस्लाइड और बादल फटने के बाद 5 हजार हजार से ज्यादा तीर्थयात्री फंस गए। लिनचोली, भीमबली में अलग-अलग जगह फंसे 5 हजार लोगों का रेस्क्यू किया गया। इसके लिए चिनूक और MI-17 समेत 7 हेलिकॉप्टर की मदद ली गई। बेहद खराब मौसम के चलते केदारनाथ दो दिन के लिए रोक दी गई है। यहां अभी भी 300 तीर्थयात्रियों के फंसे होने की जानकारी मिली है। राज्य में 48 घंटे के लिए भारी बारिश का अलर्ट है। इधर, मध्य प्रदेश के 6 जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार (2 अगस्त) को 24 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

आपको बता दें, उत्तराखंड में राहत और बचाव के लिए 72 टीमें लगी हुई है। लैंडस्लाइड से रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड से शुरू होने वाले 16 किमी के केदारनाथ ट्रैक घोड़ा पड़ाव, लिनचोली, बड़ी लिनचोली और भीमबली में पूरी तरह नष्ट हो गया है। रामबाड़ा के पास दो पुल भी बह गए। जिला प्रशासन ने दो हेल्पलाइन नंबर – 7579257572 और 01364-233387 और एक आपातकालीन नंबर 112 भी जारी किया है। साथ ही बीते दिन हिमाचल प्रदेश में 5 जगह बादल फटने से 53 लोग लापता हो गए। इनमें से 5 के शव बरामद कर दिए गए, जबकि 48 लोग अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश में NDRF, SDRF, पुलिस और होम गार्ड जवान सर्च ऑपरेशन चलाए हुए हैं। शिमला के समेज में रेस्क्यू दल को अब तक कामयाबी नहीं मिल पाई। यहां लापता 36 लोगों में से एक का भी अब तक सुराग नहीं लग पाया। एक व्यक्ति के शरीर के कुछ अंग जरूर मिले हैं। मंडी की चौहारघाटी के राजबन गांव में भी 7 लोग लापता हैं। 3 शव मिले हैं। कुल्लू के बागीपुल में भी 7 लोग लापता थे। इनमें महिला समेत 2 के शव मिल चुके हैं, जबकि 5 अभी भी लापता हैं।  NDRF ने मलाणा पावर प्रोजेक्ट के 33 मजूदरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। 18 सदस्यों की टीम रेस्क्यू के लिए पहुंची थी। 4 मजदूर मलाणा सुरंग में फंसे हुए थे। 

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