Nana Patekar Death News: नाना पाटेकर की देर रात हुई अंतिम विदाई, बेटे मल्हार ने बताया क्यों रात में ही किया अंतिम संस्कार

Nana Patekar Death News Nana Patekar Death News

Nana Patekar Death News: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार गुरुवार, 8 अक्टूबर की देर रात पुणे के बाहरी इलाके स्थित उनके फार्महाउस में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके अंतिम संस्कार के समय को लेकर कई सवाल उठ रहे थे, क्योंकि उस वक्त भी फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियां नाना पाटेकर को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचना चाहती थीं। अब उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने बताया है कि परिवार ने देर रात ही अंतिम संस्कार करने का फैसला क्यों लिया।

मीडिया से बातचीत के दौरान मल्हार से जब पूछा गया कि नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार रात में ही क्यों किया गया और अगले दिन तक इंतजार क्यों नहीं किया गया, तो उन्होंने परिवार का पक्ष स्पष्ट किया। मल्हार ने कहा, “ऐसा नहीं है कि इतनी रात को क्यों किया, कल क्यों नहीं किया। हमें लगा क्योंकि आज सुबह-सुबह ये हादसा हुआ तो ऑलरेडी समय काफी बीत चुका था, इसलिए हमने सोचा कि आज ही करेंगे।”

मल्हार के मुताबिक, नाना पाटेकर के निधन की खबर गुरुवार सुबह सामने आई थी और अंतिम संस्कार तक काफी समय बीत चुका था। ऐसे में परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। नाना पाटेकर को पुणे के बाहरी इलाके में खडकवासला के पास डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

75 साल की उम्र में हुआ निधन

नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर हुआ। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में परिवार और करीबी लोगों के अलावा फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां और राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हुईं।

अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, प्रवीण तरड़े, निर्माता साजिद नाडियाडवाला और निर्देशक अनिल शर्मा समेत कई फिल्मी हस्तियां मौजूद रहीं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर, महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और भाई जगताप समेत कई गणमान्य लोगों ने भी नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी।

करीब पांच दशक लंबा रहा फिल्मी सफर

नाना पाटेकर का फिल्मी करियर करीब पांच दशक तक चला। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत मराठी थिएटर से की थी। इसके बाद साल 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर से ही नाना पाटेकर अपने अलग अंदाज के अभिनय के लिए पहचाने जाने लगे थे।

उनकी अदाकारी में एक साथ कई रंग देखने को मिले। उन्होंने गंभीर, भावुक, आक्रामक और नकारात्मक किरदारों को जिस प्रभावशाली अंदाज में निभाया, उसने उन्हें हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं की कतार में खड़ा कर दिया।

‘परिंदा’, ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’, ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘वजूद’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। इन फिल्मों के जरिए नाना ने साबित किया कि वह केवल एक तरह के किरदारों तक सीमित रहने वाले अभिनेता नहीं थे।

‘वेलकम’ के उदय शेट्टी ने बदल दिया अंदाज

नाना पाटेकर के करियर का एक बेहद लोकप्रिय पड़ाव साल 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ रहा। इस फिल्म में उन्होंने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। यह किरदार उनके गंभीर और आक्रामक अभिनय से बिल्कुल अलग था।

अनिल कपूर के मजनू भाई के साथ नाना की केमिस्ट्री ने फिल्म में कॉमेडी का एक अलग ही रंग पैदा किया। उदय शेट्टी का किरदार दर्शकों के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि वह हिंदी सिनेमा के यादगार कॉमिक किरदारों में शामिल हो गया। नाना ने 2015 में आई ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी का किरदार निभाया।

इस भूमिका के जरिए उन्होंने यह भी साबित किया कि गंभीर और तीखे किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर कॉमेडी में भी उतने ही प्रभावी हो सकते हैं।

मराठी और हिंदी सिनेमा में लगातार सक्रिय रहे

अपने करियर के आखिरी दौर में भी नाना पाटेकर हिंदी और मराठी फिल्मों में काम करते रहे। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाए रखी। ‘द वैक्सीन वॉर’, ‘वनवास’, ‘हाउसफुल 5’ और ‘ओ’रोमियो’ जैसी फिल्मों में भी वह नजर आए।

नाना पाटेकर का योगदान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। सामाजिक कार्यों में भी उनकी सक्रियता चर्चा में रही। उनके नेतृत्व और सोच से जुड़ा नाम फाउंडेशन पानी संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम करता रहा है।

बेटे मल्हार संभालेंगे पिता की विरासत

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके बेटे मल्हार ने साफ किया है कि उनके पिता की सामाजिक सोच और काम को आगे बढ़ाया जाएगा। नाम फाउंडेशन के जरिए महाराष्ट्र के मराठवाड़ा सहित दूसरे क्षेत्रों में भी काम जारी रखने की तैयारी है।

फाउंडेशन पानी संरक्षण के क्षेत्र में पहले से काम कर रहा है। इसके अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम शुरू किया गया है। कश्मीर में भी शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित योजनाओं पर काम शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

मल्हार ने कहा कि नाना साहेब जैसे व्यक्ति वास्तव में कभी नहीं जाते। उनके काम और उपलब्धियों ने उन्हें अमर बना दिया है। उनके मुताबिक, नाना हमेशा लोगों को साथ लाने और सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करने में विश्वास रखते थे।

नाना पाटेकर ने अपने जीवन में ही फाउंडेशन के काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारियां अलग-अलग लोगों को सौंप दी थीं, ताकि उनके जाने के बाद भी सामाजिक योजनाएं रुकें नहीं। फाउंडेशन के सीईओ गणेश थोरात के नेतृत्व में इन कामों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

अभिनय के लिए मिले कई बड़े सम्मान

नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। इसके अलावा उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार और अन्य सम्मान भी हासिल हुए। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।

एक अभिनेता के तौर पर नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए किसी तय फॉर्मूले पर निर्भर नहीं किया। कभी गंभीर किरदार, कभी खलनायक, कभी आम आदमी और कभी कॉमिक गैंगस्टर—उन्होंने हर भूमिका को अपने अंदाज में यादगार बनाया।

उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसने लगभग पांच दशकों तक पर्दे पर अपनी अलग छाप छोड़ी। हालांकि मल्हार के मुताबिक नाना पाटेकर की विरासत सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं रहेगी। उनका अभिनय आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा और सामाजिक क्षेत्र में उनके द्वारा शुरू किए गए काम भी आगे बढ़ते रहेंगे।